Writing is selfishness

The cursor on my writing app blinks thinking I will have something to say . Appear ,disappear,appear ,disappear , once per second ever so patient ever so diligent ever to expectant. Why do we write anyways? Seems like a rhetorical question . Because we love to write? Or something else. Many people say that we

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hindi shayri , nadi mein paon

कैसे लोग हो गये हैं ना हम

कुछ दी पहले में छुट्टी बिताने एक नदी के किनारे गया. ऐसा लगा की कुछ अलग सा है. सोचा .. कैसे लोग हो गये हैं ना हम कि नदी में पावं डुबोना भी अब अंजाना सा लगता है और जाते जाते फिर नदी के बहते पानी की कल कल सुनने गया ताकि शहेर की आवाज़

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