कैसे लोग हो गये हैं ना हम

hindi shayri , nadi mein paon

कुछ दी पहले में छुट्टी बिताने एक नदी के किनारे गया. ऐसा लगा की कुछ अलग सा है. सोचा ..

कैसे लोग हो गये हैं ना हम
कि नदी में पावं डुबोना भी अब अंजाना सा लगता है

hindi shayri , nadi mein paon

और जाते जाते

फिर नदी के बहते पानी की कल कल सुनने गया
ताकि शहेर की आवाज़ को कम से कम मन में तो दबा सकूँ

hhindi shayri , nadi ki kal kal

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